इयत्ता-प्रकृति

Sunday, March 3, 2013

प्रदूषित कविताएँ

अब मैं
प्रदूषण पर
कविताएँ नहीं करता .

क्योंकि जल, वायु या
पर्यावरण पर
प्रदूषण  की कविताएँ
पत्रिकाओं में
नहीं छपतीं
सामान्य कविताओं की तरह.

ये कविताएँ
मुझे
अवसाद से
प्रदूषित कर जातीं हैं
बुरी तरह !

प्रदूषण की कविताएँ
मौसमी होतीं है।

जबकि प्रदूषण,
बारहों महीने ..
प्रतिदिन
हर क्षण .... !

अब मैं
प्रदूषण पर
कविताएँ नहीं करता ?

[] राकेश सोहम , नवीं मुंबई