इयत्ता-प्रकृति

Tuesday, September 22, 2009

प्रदूषण : कैसे-कैसे ?

ध्वनि, वायु व जल प्रदूषण
प्रदूषण कैसे कैसे,
सब जीवों के दुश्मन हैं ये
आतंकवादियों जैसे ।
0000
धूम-धड़का, शोर-शराबा
बेहद हानिकारक,
कानों को ये बधिर बना दें
इनकी शक्ति मारक ।
-
इसीलिए सीमित कर ध्वनि को
प्रदूषण रुके बिन पैसे । ।
0000
पेट्रोल, डीज़ल के धुंए से
प्रदूषित होती वायु,
हवा में घुलता ज़हर इसी से
जीवों की घटती आयु ।
-
वृक्ष लगाओ, ये वायु के
शुद्धिकारक जैसे । ।
0000
गंदे - दूषित जल से नदियों का
पानी निर्मल नहीं,
जल-संरक्षण व जल-उपचार
ये उपाय हैं सही ।
-
जल ही जीवन है ये मानो
जल को जल के जैसे । ।
0000
भू को दूषित कर रहे
कचरा - पोलिथीन,
जिससे होती भूमि की
उर्वरा शक्ति क्षीण ।
-
भू-प्रदूषण रोको वरना
अन्न उगेगा कैसे ? ?
०००००
राकेश 'सोहम'

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3 Comments:

  • एक सुन्दर पर्यावरण कविता से आगाज !

    By Blogger Arvind Mishra, At September 22, 2009 at 11:00 PM  

  • By Blogger ज़ाकिर अली ‘रजनीश’, At September 23, 2009 at 5:51 PM  

  • धरा सुसज्जित होती जिनसे, वो ही वृक्ष कहाते हैं,

    जो गौरव और मान बढ़ाते, वो ही दक्ष कहाते हैं।


    हरित क्रान्ति के संवाहक, ये जन,गण के रखवाले,

    प्राण प्रवाहित करने वाली, मन्द समीर बहाते हैं।


    पत्ते, फूल, मूल, फल इसके, जीवन देने वाले हैं,

    देते हैं ये अन्न और अमृत सा, जल बरसाते हैं।


    उपवन, आँगन, खेत, बाग में हमको पेड़ लगाने हैं,

    इनकी शीतल छाया में ही जीव-जन्तु सुख पाते हैं।


    धरती का श्रंगार अमर है पेड़ों की हरियाली से,

    कदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।

    By Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक, At September 24, 2009 at 12:19 PM  

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